Time’s Illusions

Time’s Illusions

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Broken, twisted, bent out of shape

fading memories tell a strange tale…

joy projected brighter, more poignant, highlighted with a crimson pen

murky smudges drawn over with a dull veil…

see how slyly Time paints

mocking, laughing, deceiving with faulty sketches of moments now stale…

O heart take heed of Time’s Illusion

that makes the bygones gleam so bright and the ‘now’ appear so pale…

सज़ा

सज़ा

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सुना था दिल तोड़ने की सज़ा मिलेगी

पर सोचा ना था ऐसे मिलेगी..

एक दर्द सा रहता है सीने में

साँसे बोझिल लगती हैं…

आँखों में तुम रहते हो

पर फिर भी ये नम रहतीं हैं..

शब्दों का सब खेल है

यारी, दोस्ती, इश्क़, वफ़ा

एक शब्द मरहम लगाता है..

तो दूसरा ज़ख़्म दिए जाता है

नाज़ था मुझे उन यादों पे..

साथ बनाई थीं जो ‘हमने’

पीछे मुड़ के देखा तो जाना..

उन ‘हमारे’ वाले लम्हों में

बस ‘मैं’ ही ‘मैं’ थी..

और थीं तुम्हारे गुज़रे कल की परछाईंयाँ

बिखरती हूँ..फिर संभलती हूँ..

जानती हूँ…सब समझती हूँ

पर फिर भी दरारें पड़ गयीं..

पागल से मन की बनाई हुईं सारी दीवारें ढ़ह गयीं

प्यार का स्वाद चख़ाके हमें

आँखों में पानी दे गये..

कल एक दिल तोड़ा था हमनें

आज सज़ा तुम दे गये.

अब सोचती हूँ…

अब सोचती हूँ…

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अब सोचती हूँ कि तुम्हें काग़ज़ों में मोड़ के धूल भरे जिल्द वाली किसी किताब में छुपा दूँ

तुम्हारी यादों के दीमक लगे पन्नों में बिखरते कुछ अज़ीज़ लफ़्ज़ों को बचा लूँ

खुरदरी उंगलियों की पकड़ जो अब इस दिल पे कुछ ढीली पड़ी है…सोचती हूँ कि सुर्ख अश्कों से एक तस्वीर बना लूँ

वरना वक़्त तो बदनाम है हर ज़ख़्म को भर देने के लिए…हर अश्क़ को पानी में बदल देने के लिए

सोचती हूँ आँखों में अब तक तैरते रह गये कुछ नमकीन पलों को डूबने से बचा लूँ

तुम और मैं जब हम हुआ करते थे…मुख़्तर से उस वक़्त के कुछ हसीन लम्हों को स्याही में छुपा दूँ

दिल में बाकी बचे इस दर्द को किसी खूबसूरत सी ग़ज़ल के मुखड़े में सज़ा दूँ…

तुम्हारी यादों को अपनी यादाश्त कि मौहताज होने से बचा लूँ

कि फिर ना भूलो भी तुम और ना याद ही रह जाओ..

अब सोचती हूँ कि तुम्हें काग़ज़ों में मोड़ के धूल भरे जिल्द वाली किसी किताब में छुपा दूँ